Thursday, 25 October 2018

डॉ परवेझ हमीदखान पठाण (Consulting Cosmetic Physician)

आयेशा क्लिनिक अँड हॉस्पिटल

डॉ परवेझ हमीदखान पठाण

(Consulting Cosmetic Physician)

कॉस्मेटिक स्पेशालिस्ट

चेहऱ्यावरील वांग,पुरळ,तारुण्यपिटिका,काळे डाग,सुरकुत्या,पुटकुळ्या,तिळ, अनावश्यक केसांची वाढ,मोस (चामखीळ) चेहऱ्यावरील व्रण व खड्डे.

Melasma,Hyperpigmentation,Nodular Acne, Post acne scars, Hirsutism, Wrinkles, Moles, Facial Noncarcinomous cysts.

Treatment Available :-

Chemical Peeling

Micro Derm Abrasion

Derm Abrasion

Derm Cottery

Laser Treatment


बुधवार दिनांक १२ सप्टेंबर २०१८ रोजी


वेळ :- सकाळी ११ ते संध्या ५


ठिकाण :- डॉ पठाण यांचे आयेशा क्लीनिक अँड हॉस्पिटल,गाळा क्रमांक ७,पहिला मजला, स्टार प्लाझा,शिळफाटा, खोपोली. मो. न. ७७७४८८१२२२

For Appointment call 7774881222

shayri

Kya Baat Kahiye Duniya Ki,
Har Shakhs Ke Apne Afsaane Hain,
Jo Kaam kar rahe Hai Usse Log Bura Kehte Hain,
Jisko Dekha Nahi Kabhi Usse Khuda Kehte Hain!!


दोस्तों ना रखो किसी से ईर्ष्या,
ना रखो किसी से कोई होड़,
तय करो अपनी मंजीले,
और लगा लो अपनी दौड़!!

Saturday, 22 September 2018

Personality Development

Personality Development

Friends today we are going learn how to Develop our personality.
Before you start working on your personality,you need to understand yourself.first identifie your weaknesses and strenths.This will enable you to focus on what part you have to work hard and give maximum attention.
We all want to become successfull in life. Havind desire to become successfull in life is very important. because as APJ Kalam says you must have dreams,"dreams transforms in to thought and thought results in action."
But just havind desire not enough you must have confidence and trust in oneself.The desire of your heart will be granted if you believe in yourself.
you have to priotise what you like best of yourself
what are things which will bring tremendous positive influence
what are the things which makes you happy and bring smile on your face
what are the things which are need to change.
what are the thing which you desire to achive in life and feel proud.
and how and what are your planning to achive your goal.

identifing this thigs are very important and then you will identifie on which area you need to focus and give more attention.and that things will develop you personality.

what is personality
is it what we perceive in mind. inside thoughts contribute greatly to our physical appearance.actually personality is what you are and its your identity.

so is the peronality important ?
 yes it is important, becouse your attitude,presentation and conduct portrait the picture about yourself
and it's very unique thing.

Only your intrinsic thought can groom your personality.and no any class in the world can develop personality but you yourself can develop.
personality deveplopment is not a day or a two day process it is a continous process and its evolution depends on its personal and professional life.often most of the time persons have different personality at different places and different phase of life.

same person have a different personality when he is a son, a father, a brother a boss a husband. he have different in familly life and in professional life.

positive personality
usually independent and direct and dont mind in taking risk to achieve there goals they enjoy change and they are very focused.
accuracy and do work seriously they are perfectionist.thoughtfull and innovative.

negative personality
people in routine life suffer from negativism,same regular activity and shedule makes them bore.and they become insensitive towards life.easily be hurt,takes personally.and emotinally weak.

extrovert/social
like travel,like groups,always happy always center of attention.always have a high energy.and they are direct in approach.

introvert
doesnt like change,they like general life.




Wednesday, 29 August 2018

अशी असते मैत्री.

मैत्री म्हणजे शब्दांशिवाय एकमेकांचं मन जाणून घेणं, चुकलं तर ओरडणं, कौतुकाची थाप देणं, एकमेकांचा आधार बनणं,

मैत्री म्हणजे अतूट विश्वास, मैत्री म्हणजे आयुष्याचा प्रवास सुसह्य करणारी हिरवीगार पाऊलवाट.



मैत्रीमध्ये जरुरी नसते दररोजची भेट..
येथे ह्रदयाचा ह्रदयाशी संवाद असतो थेट..

मैत्री ठरवून कधीच होत नाही, 
हाच मैत्रीचा एक फ़ायदा आहे...
आणि मैत्रीला कुठले नियम नाहीत, 
हाच मैत्रीचा पहिला कायदा आहे ..!!!



आयुष्यभर साथ देणारीच माणसे जोडा. 
नाहीतर... 

तासभर साथ देणारी माणसं बस मध्ये पण भेटतात. 


घर विकत घेऊ शकता पण त्या घराचे घरपण नाही.
घड्याळ विकत घेऊ शकता पण गेलेली वेळ नाही.
मोठे पद विकत घेऊ शकता पण आदर नाही.
मखमली गादी विकत घेऊ शकता पण शांत झोप नाही.
पुस्तके विकत घेऊ शकता पण विद्या नाही.
औषधे विकत घेऊ शकता पण चांगले आरोग्य नाही.
रक्त विकत घेऊ शकता पण कोमेजून जात असलेले जीवन नाही.
पैसा हेच सर्वस्व नाही पैसा जरुर कमवावे 
पण त्यासाठी आयुष्यातले सुंदर क्षण गमावू नये.
पैश्याची पूजा जरूर करावी पण पैश्याचे गुलाम बनू नये.
माणसासाठी पैसा बनला आहे. 
पैश्यासाठी माणूस नाही.
आपले मित्र हे आपले धन आहे.
वेळ काढा भेटा बोला. 
रक्तापेक्षा अश्रू श्रेष्ठ असतात कारण 
शरीराला जखम झाली तर रक्त बाहेर येते,

पण अश्रू ला बाहेर येण्यासाठी मनाला जखमी व्हावे लागते

मनाला जखमी व्हावे लागते ... 

अशी असते मैत्री. 




Monday, 13 August 2018

कुरआन में मानवता के लिए 99 सीधे आदेश ! जानिए

कुरआन में मानवता के लिए 99 सीधे आदेश ! जानिए

1. बदज़ुबानी से बचो | (सूरह 3:आयत न० 159)

2. गुस्से को पी जाओ | (सूरह 3: आयत न०134)

3. दूसरों के साथ भलाई करो | (सूरह 4:आयत न० 36)

4. घमंड से बचो | (सूरह 7:आयत न०13)

5. दूसरों की गलतियां माफ करो | (सूरह 7: आयत न० 199)

6. लोगों से नरमी से बात करो | (20:आयत न० 44)

7. अपनी आवाज़ नीची रखों | (सूरह 31:आयत न० 19)

8. दूसरों का मज़ाक न उड़ाओ | (सूरह 49:आयत न० 11)

9. वालदैन की इज़्ज़त और उनकी फरमानबरदारी करो | (सूरह 17:आयत न० 23)

10. वालदैन की बेअदबी से बचो और उनके सामने उफ़ तक न कहो | (सूरह 17:आयत न० 23)

11. इजाज़त के बिना किसी के कमरे मे (निजी कक्ष) में दाखिल न हो (सूरह 24:आयत न० 58)

12. आपस में क़र्ज़ के मामलात लिख लिया करो | (सूरह 2:आयत न० 282)

13. किसी की अंधी तक़लीद मत करो | (सूरह 2: आयत न० 170)

14. अगर कोई तंगी मे है तो उसे कर्ज़ उतारने में राहत दो | (सूरह 2:आयत न० 280)

15. ब्याज मत खाओ | (सूरह 2:आयत न० 275)

16. रिश्वत मत खाओ | (सूरह 2:आयत न० 188)

17. वादों को पूरा करो | (सूरह 2:आयत न० 177)

18. आपस में भरोसा कायम रखो | (सूरह 2:आयत न० 283)

19. सच और झूठ को आपस में ना मिलाओ | (सूरह 2: आयत न० 42)

20. लोगों के बीच इंसाफ से फैसला करो | (सूरह 4:आयत 58)

21. इंसाफ पर मज़बूती से जम जाओ | (सूरह 4:आयत 135)

22. मरने के बाद हर शख्स की दोलत उसके करीबी रिश्तेदारों में बांट दो | (सूरह 4:आयत 7)

23. औरतों का भी विरासत में हक है | (सूरह 4:आयत 7)

24. यतीमों का माल नाहक मत खाओ | (सूरह 4:आयत 10)

25. यतीमों का ख्याल रखो | (सूरह 2:आयत 220)

26. एक दूसरे का माल नाजायज़ तरीक़े से मत खाओ | (सूरह 4:आयत 29)

27. किसी के झगड़े के मामले में लोगों के बीच सुलह कराओ | (सूरह 49:आयत 9)

28. बदगुमानी(guesswork) से बचो | (सूरह 49:आयत 12)

29. गवाही को मत छुपाओ | (सूरह 2:आयत 283)

30. एक दूसरे के भेद न टटोला करो और किसी की चुगली मत करो | (सूरह 49:आयत 12)

31. अपने माल में से खैरात करो | (सूरह 57: आयत 7)

32. मिसकीन गरीबों को खिलाने की तरग़ीब दो | (सूरह 107:आयत 3)

33. जरूरतमंद को तलाश कर उनकी मदद करो | (सूरह 2:आयत 273)

34. कंजूसी और फिज़ूल खर्ची से बचा करो | (सूरह 17:आयत 29)

35. अपनी खैरात लोगों को दिखाने के लिये और एहसान जताकर बर्बाद मत करो | (सूरह 2:आयत 264)

36. मेहमानों की इज़्ज़त करो | (सूरह51:आयत 26)

37. भलाई पर खुद अमल करने के बाद दूसरों को बढ़ावा दो | (सूरह2:आयत 44)

38. ज़मीन पर फसाद मत करो | (सूरह 2:आयत 60)

39. लोगों को मस्जिदों में अल्लाह के ज़िक्र से मत रोको | (सूरह 2:आयत 114)

40. सिर्फ उन से लड़ो जो तुम से लड़ें | (सूरह 2: आयत 190)

41. जंग के आदाब का ख्याल रखना (सूरह 2:आयत 191)

42. जंग के दौरान पीठ मत फेरना (सूरह 8:आयत 15)

43. दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं (सूरह 2: आयत 256)

44. सभी पैगम्बरों पर इमान लाओ (सूरह 2: आयत 285)

45. हालत माहवारी में औरतों के साथ संभोग न करो (सूरह 2:आयत 222)

46. ​​मां बच्चों को दो साल तक दूध पिलाएँ (सूरह 2:आयत 233)

47. खबर दार ज़िना (fornication) के पास किसी सूरत में भी नहीं जाना (सूरह 17:आयत 32)

48. हुक्मरानो को खूबीे देखकर चुना करो (सूरह 2: आयत 247)

49. किसी पर उसकी ताकत से ज़्यादा बोझ मत डालो (सूरह 2:आयत 286)

50. आपस में फूट मत डालो (सूरह 3:आयत 103)

51. दुनिया की तखलीक चमत्कार पर गहरी चिन्ता करो (सूरह 3: आयत 191)

52. मर्दों और औरतों को आमाल का सिला बराबर मिलेगा (सूरह 3: आयत 195)

53. खून के रिश्तों में शादी मत करो (सूरह 4:आयत 23)

54. मर्द परिवार का हुक्मरान है (सूरह 4:34)

55. हसद और कंजूसी मत करो (सूरह 4:आयत 37)

56. हसद मत करो (सूरह 4:आयत 54)

57. एक दूसरे का कत्ल मत करो (सूरह 4:आयत 92)

58. खयानत करने वालों के हिमायती मत बनो (सूरह 4: आयत 105)

59. गुनाह और ज़ुल्म व ज़यादती में मदद मत करो (सूरह 5:आयत 2)

60. नेकी और भलाई में सहयोग करो (सूरह 5: आयत 2)

61. अक्सरियत मे होना सच्चाई का सबूत नहीं (सूरह 6:आयत 116)

62. इंसाफ पर कायम रहो (सूरह 5:आयत 8)

63.जुर्म की सज़ा मिसाली तौर में दो (सूरह 5:आयत 38)

64. गुनाह और बुराई आमालियों के खिलाफ भरपूर जद्दो जहद करो (सूरह 5:आयत 63)

65. मुर्दा जानवर, खून, सूअर का मांस निषेध हैं (सूरह 5: आयत 3)

66. शराब और नशीली दवाओं से खबरदार (सूरह 5:आयत 90)

67. जुआ मत खेलो (सूरह 5:आयत 90)

68. दूसरों की आस्था का मजाक ना उडाओ (सूरह 6: आयत 108)

69. लोगों को धोखा देने के लिये नाप तौल में कमी मत करो ( सूरह 6: आयत 152)

70. खूब खाओ पियो लेकिन हद पार न करो ( सूरह 7:आयत 31)

71. मस्जिदों में इबादत के वक्त अच्छे कपड़े पहनें (सूरह 7:आयत 31)

72. जो तुमसे मदद और हिफाज़त और पनाह के तलबगार हो उसकी मदद और हिफ़ाज़त करो (सूरह 9:आयत 6)

73. पाक साफ रहा करो (सूरह 9:आयत 108)

74. अल्लाह की रहमत से कभी निराश मत होना (सूरह 12:आयत 87)

75. अज्ञानता और जिहालत के कारण किए गए बुरे काम और गुनाह अल्लाह माफ कर देगा (सूरह 16:आयत 119)

76. लोगों को अल्लाह की तरफ हिकमत और नसीहत के साथ बुलाओ (सूरह 16:आयत 125)

77. कोई किसी दूसरे के गुनाहों का बोझ नहीं उठाएगा (सूरह17: आयत 15)

78. मिसकीनी और गरीबी के डर से बच्चों की हत्या मत करो (सूरह 17:आयत 31)

79. जिस बात का इल्म न हो उसके पीछे(Argue) मत पड़ो। (सूरह 17:आयत 36)

80. निराधार और अनजाने कामों से परहेज़ करो (सूरह 23: आयत 3)

81. दूसरों के घरों में बिला इजाज़त मत दाखिल हो (सूरह 24:आयत 27)

82. जो अल्लाह में यकीन रखते हैं, अल्लाह उनकी हिफाज़त करेगा (सूरह 24:आयत 55)

83. ज़मीन पर आराम और सुकून से चलो (सूरह 25:आयत 63)

84. अपनी दुनियावी ज़िन्दगी को अनदेखा मत करो (सूरह 28:आयत 77)

85. अल्लाह के साथ किसी और को मत पुकारो (सूरह 28:आयत 88)

86. समलैंगिकता से बचा करो (सूरह 29:आयत 29)

87. अच्छे कामों की नसीहत और बुरे कामों से रोका करो (सूरह 31:आयत 17)

88. ज़मीन पर शेखी और अहंकार से इतरा कर मत चलो (सूरह 31:आयत 18)

89. औरतें अपने बनाओ सिनघार तकब्बुर न करें (सूरह 33:आयत 33)

90. अल्लाह सभी गुनाहों को माफ कर देगा सिवाय शिर्क के (सूरह 39:आयत 53)

91. अल्लाह की रहमत से मायूस मत हो (सूरह 39:आयत 53)

92. बुराई को भलाई से दफा करो (सूरह 41:आयत 34)

93. नमाज़ से अपने काम अंजाम दो (सूरह 42:आयत 38)

94. तुम से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जिसने सच्चाई और भलाई इख्तियार की हो (सूरह 49:आयत 13)

95. दीन मे रहबानियत मौजूद नहीं (सूरह 57:आयत 27)

96. अल्लाह के यहां इल्म वालों के दरजात बुलंद हैं (सूरह 58:आयत 11)

97. ग़ैर मुसलमानों के साथ उचित व्यवहार और दयालुता और अच्छा व्यवहार करो (सूरह 60:आयत 8)

98. अपने आप को नफ़्स की हर्ष पाक रखो | (सूरह 64:आयत 16)

99. अल्लाह से माफी मांगो वो माफ करने और रहम करनेवाला है | (सूरह 73:आयत 20)

*अल्लाह तआला हम सब को कहने , सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाये और
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताये हुए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये
जो फिरको मे बट रहे है उनको उनके हाथो मे दामन ए मुस्तफा ﷺ दे… और सही रास्ते पर चलने की तौफीक दे..
ईमान की दौलत और कलिमा तययब पर खत्मा फरमा….. अमीन अल्लाहुम्मा अमीन ,..

Saturday, 28 April 2018

Life Instructions from the Quran from our Creator Almighty God.

Life Instructions from the Quran from our Creator Almighty God.
1. Do not be rude in speech (3:159)
2. Restrain Anger (3:134)
3. Be good to others (4:36)
4. Do not be arrogant (7:13)
5. Forgive others for their mistakes (7:199)
6. Speak to people mildly (20:44)
7. Lower your voice (31:19)
8. Do not ridicule others (49:11)
9. Be dutiful to parents(17:23)
10. Do not say a word of disrespect to parents (17:23)
11. Do not enter parents’ private room without asking permission (24:58)
12. Write down the debt (2:282)
13. Do not follow anyone blindly (2:170)
14. Grant more time to repay if the debtor is in hard time (2:280)
15. Don’t consume interest (2:275)
16. Do not engage in bribery (2:188)
17. Do not break the promise (2:177)
18. Keep the trust (2:283)
19. Do not mix the truth with falsehood (2:42)
20. Judge with justice between people (4:58)
21. Stand out firmly for justice (4:135)
22. Wealth of the dead should be distributed among his family members (4:7)
23. Women also have the right for inheritance (4:7)
24. Do not devour the property of orphans (4:10)
25. Protect orphans (2:220)
26. Do not consume one another’s wealth unjustly (4:29)
27. Try for settlement between people (49:9)
28. Avoid suspicion (49:12)
29. Do not spy and backbite (2:283)
30. Do not spy or backbite (49:12)
31. Spend wealth in charity (57:7)
32. Encourage feeding poor (107:3)
33. Help those in need by finding them (2:273)
34. Do not spend money extravagantly (17:29)
35. Do not invalidate charity with reminders (2:264)
36. Honor guests (51:26)
37. Order righteousness to people only after practicing it yourself(2:44)
38. Do not commit abuse on the earth (2:60)
39. Do not prevent people from mosques (2:114)
40. Fight only with those who fight you (2:190)
41. Keep the etiquettes of war (2:191)
42. Do not turn back in battle (8:15)
43. No compulsion in religion (2:256)

Thursday, 15 March 2018

॥खतना नहीं खतरनाक, बचाता है खतरनाक बीमारियों से॥

॥खतना नहीं खतरनाक,
बचाता है खतरनाक बीमारियों से॥

* अमरीका के शिकागो स्थित बालरोग पर शोध करने वाली संस्था, 'द अमरीकन एकेडेमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स ने अपने ताजा बयान में कहा है कि,

* नवजात बच्चों में किए जाने वाले,
॥खतना या सुन्नत॥ के सेहत के लिहाज से बड़े फायदे हैं।

* सच भी है कि समय-समय पर दुनियाभर में हुए शोधों ने यह साबित किया है कि,

* खतना इंसान की कई बड़ी बीमारियों से हिफाजत करता है। खतना एक शारीरिक शल्यक्रिया है।

* जिसमें आमतौर पर मुसलमान नवजात बच्चों के लिंग के ऊपर की चमड़ी काटकर अलग की जाती है।

* इस समय खतना (सुन्नत) यूरोपीय देशों में बहस का विषय बना हुआ है।

* ॥खतना॥ को लेकर पूरी दुनिया में एक जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है।

* इस पर विवाद तब शुरू हुआ जब जर्मनी के कोलोन शहर की जिला अदालत ने अपने एक फैसले में कहा कि शिशुओं का खतना करना उनके शरीर को कष्टकारी नुकसान पहुंचाने के बराबर है। फैसले का जबर्दस्त विरोध हुआ।

* इस मुद्दे का अहम पहलू है हाल ही में आया अमरीका के शिकागो स्थित बालरोग पर शोध करने वाली संस्था 'द अमरीकन एकेडेमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स' का उपरोक्त ताजा बयान आया है।

॥वैज्ञानिकों ने दिए सबूत॥

* शिकागो स्थित बालरोग चिकित्सकों के इस बयान का आधार वैज्ञानिक सबूत हैं जिनके आधार पर यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि जो बच्चे खतने करवाते हैं, उनमें कई तरह की बीमारियां होने की आशंका कम हो जाती है।

* इनमें खास तौर पर छोटे बच्चों के,

* यूरिनरी ट्रैक्ट में होने वाले इंफेक्शन,

* पुरुषों के गुप्तांग संबंधी कैंसर,

* यौन संबंधों के कारण होने वाली बीमारियां,

* एचआईवी और सर्वाइकल कैंसर का कारक ह्युमन पैपिलोमा वायरस यानि एचपीवी शामिल है।

* एकेडेमी उन अभिभावकों का समर्थन करता है जो अपने बच्चे का खतना करवाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि खतना किए गए पुरुषों में संक्रमण का जोखिम कम होता है,

* क्योंकि लिंग की आगे की चमड़ी के बिना कीटाणुओं के पनपने के लिए भेज-नमी का वातावरण नहीं मिलता है।

॥एड्स और गर्भाशय कैंसर से हिफाजत॥

* महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का कारण ह्युमन पैपिलोमा वायरस होता है।

* यह वायरस लिंग की उसी चमड़ी के इर्द-गिर्द पनपता है जो संभोग के दौरान महिलाओं में प्रेषित हो जाता है।

* ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में अप्रेल 2002 में प्रकाशित एक आर्टिकल का सुझाव था कि खतने से महिला गर्भाशय कैंसर को बीस फीसदी तक कम किया जा सकता है।

* खतने से एचआईवी और एड्स से हिफाजत होती है।

* ब्रिटिश मेडिकल जर्नल के ही मई 2000 के एक आर्टिकल में उल्लेख था कि खतना किए हुए पुरुष में एचआईवी संक्रमण का खतरा आठ गुना कम होता है।

* हजार में से एक पुरुष लिंग कैंसर का शिकार हो जाता है लेकिन खतना इंसान की इस बीमारी से पूरी तरह हिफाजत करता है।

* नवम्बर 2000 में बीबीसी टेलीविजन ने यूगांडा की दो जनजातीय कबीलों पर आधारित एक रिपोर्ट प्रसारित की।

* इसके मुताबिक उस कबीले के लोगों में एड्स नगण्य पाया गया जो खतना करवाते थे, जबकि दूसरे कबीले के लोग जो खतना नहीं करवाते थे, उनमें एड्स के मामले ज्यादा पाए गए।

* इस कार्यक्रम में बताया गया कि कैसे लिंग के ऊपर चमड़ी जो खतने में हटाई जाती है, उसमें संक्रमण फैलने और महिलाओं में प्रेषित होने की काफी आशंका रहती है।

॥आम है अमरीका में
नवजात बच्चों का खतना॥

* अमरीकी समाज का एक बड़ा वर्ग बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस प्रथा को मानने लगा है।

* नेशनल हैल्थ एण्ड न्यूट्रिशन एक्जामिनेशन सर्वेज की ओर से अमरीका में 1999 से 2004 तक कराए गए सर्वे में 79 फीसदी पुरुषों ने अपना खतना करवाया जाना स्वीकार किया।

* नेशनल हॉस्पीटल डिस्चार्ज सर्वे के  अनुसार अमरीका में 1999  में 65 फीसदी नवजात बच्चों का खतना किया गया।

* अमरीका के आर्थिक और सामाजिक रूप से सम्पन्न परिवारों में जन्में नवजात बच्चों में खतना ज्यादा पाया गया।

* विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में करीब 30 फीसदी पुरुषों का खतना हुआ है।

॥सांसदों ने करवाया संसद में खतना॥

* यही नहीं एचआईवी की रोकथाम के लिए अफ्रीका के कई देशों में पुरुषों में खतना करवाने को बढ़ावा दिया जा रहा है।

* जिम्बाब्वे में एचआईवी संक्रमण रोकने के लिए चलाए गए एक अभियान के तहत जून 2012 में कई सांसदों ने संसद के भीतर खतना करवाया।

* इसके लिए संसद के भीतर एक अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाया गया है।

* समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार जिम्बाब्वे की दो मुख्य पार्टियों के कम-से-कम 60 सांसदों ने बारी-बारी से आकर चिकित्सकीय परामर्श लिया और फिर शिविर में जाकर परीक्षण करवाया।

* अभियान की शुरुआत में बड़ी संख्या में सांसदों ने हिस्सा लेते हुए एचआईवी टेस्ट करवाते हुए इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए खतना करवाने का संकल्प लिया था।
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॥खतना॥शंका का निवारण॥

* अगर लिंग की खतना में हटाई जाने वाली चमड़ी इतनी नुकसानदायक है तो अल्लाह ने इसे बनाया ही क्यों?

* मननपात्र बात यह है कि अल्लाह ने इंसानी जिस्म में ओर भी कई ऐसी चीजें बनाई हैं जिनको हम हटा देते हैं,

* जैसे नाखून और आंतरिक हिस्से के बाल। इन चीजों को हटाना पाकीजगी के लिए जरूरी है। लेकिन इसके मायने यह कतई नहीं कि ये बेकार चीजें हैं और इनको बनाया ही नहीं जाना चाहिए।

* इंसान नाक से गंदगी निकालता है,

* बदन के दूसरे हिस्सों से गंदगी दूर करता है,

* तो क्या हमें यह कहना चाहिए कि अल्लाह ने यह गंदगी बनाई ही क्यों ताकि इसे दूर करने की जरूरत ही नहीं पड़ती?

* यह कहना कि अल्लाह बेकार चीजें नहीं बनाता, एकदम सही है।

* लेकिन हम क्या जानें कि जिन चीजों को हटाने के लिए कहा गया है वो बेकार ही है?

* अल्लाह ही बेहतर जानता है कि वह किस तरह फायदेमंद है?

* गर्भावस्था में फायदेमंद है,

* पैदाइश के शुरुआती सालों में या फिर उस चीज के होने और फिर हटने में ही कोई फायदा छिपा हो।

* अल्लाह के पैगम्बर और रसूलुल्लाह सल. के मैसेज के जरिए हमें यही तो सिखाते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

* दूसरा यह कहना कि खतना के बारे में कुरआन और हदीस में कहां लिखा है?

* बुखारी की यह हदीस है-

* अबू हुरैरा रिवायत करते हैं कि मैंने पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. से यह कहते हुए सुना है कि,

* ये पांच आदतें फितरत का हिस्सा रही हैं-

* खतना कराना,

* शर्मगाहों के बाल काटना,

* मूंछे छंटवाना,

* नाखून काटना और

* बगल के बाल काटना।
(बुखारी, बुक-72, हदीस-779)