Monday, 13 August 2018

कुरआन में मानवता के लिए 99 सीधे आदेश ! जानिए

कुरआन में मानवता के लिए 99 सीधे आदेश ! जानिए

1. बदज़ुबानी से बचो | (सूरह 3:आयत न० 159)

2. गुस्से को पी जाओ | (सूरह 3: आयत न०134)

3. दूसरों के साथ भलाई करो | (सूरह 4:आयत न० 36)

4. घमंड से बचो | (सूरह 7:आयत न०13)

5. दूसरों की गलतियां माफ करो | (सूरह 7: आयत न० 199)

6. लोगों से नरमी से बात करो | (20:आयत न० 44)

7. अपनी आवाज़ नीची रखों | (सूरह 31:आयत न० 19)

8. दूसरों का मज़ाक न उड़ाओ | (सूरह 49:आयत न० 11)

9. वालदैन की इज़्ज़त और उनकी फरमानबरदारी करो | (सूरह 17:आयत न० 23)

10. वालदैन की बेअदबी से बचो और उनके सामने उफ़ तक न कहो | (सूरह 17:आयत न० 23)

11. इजाज़त के बिना किसी के कमरे मे (निजी कक्ष) में दाखिल न हो (सूरह 24:आयत न० 58)

12. आपस में क़र्ज़ के मामलात लिख लिया करो | (सूरह 2:आयत न० 282)

13. किसी की अंधी तक़लीद मत करो | (सूरह 2: आयत न० 170)

14. अगर कोई तंगी मे है तो उसे कर्ज़ उतारने में राहत दो | (सूरह 2:आयत न० 280)

15. ब्याज मत खाओ | (सूरह 2:आयत न० 275)

16. रिश्वत मत खाओ | (सूरह 2:आयत न० 188)

17. वादों को पूरा करो | (सूरह 2:आयत न० 177)

18. आपस में भरोसा कायम रखो | (सूरह 2:आयत न० 283)

19. सच और झूठ को आपस में ना मिलाओ | (सूरह 2: आयत न० 42)

20. लोगों के बीच इंसाफ से फैसला करो | (सूरह 4:आयत 58)

21. इंसाफ पर मज़बूती से जम जाओ | (सूरह 4:आयत 135)

22. मरने के बाद हर शख्स की दोलत उसके करीबी रिश्तेदारों में बांट दो | (सूरह 4:आयत 7)

23. औरतों का भी विरासत में हक है | (सूरह 4:आयत 7)

24. यतीमों का माल नाहक मत खाओ | (सूरह 4:आयत 10)

25. यतीमों का ख्याल रखो | (सूरह 2:आयत 220)

26. एक दूसरे का माल नाजायज़ तरीक़े से मत खाओ | (सूरह 4:आयत 29)

27. किसी के झगड़े के मामले में लोगों के बीच सुलह कराओ | (सूरह 49:आयत 9)

28. बदगुमानी(guesswork) से बचो | (सूरह 49:आयत 12)

29. गवाही को मत छुपाओ | (सूरह 2:आयत 283)

30. एक दूसरे के भेद न टटोला करो और किसी की चुगली मत करो | (सूरह 49:आयत 12)

31. अपने माल में से खैरात करो | (सूरह 57: आयत 7)

32. मिसकीन गरीबों को खिलाने की तरग़ीब दो | (सूरह 107:आयत 3)

33. जरूरतमंद को तलाश कर उनकी मदद करो | (सूरह 2:आयत 273)

34. कंजूसी और फिज़ूल खर्ची से बचा करो | (सूरह 17:आयत 29)

35. अपनी खैरात लोगों को दिखाने के लिये और एहसान जताकर बर्बाद मत करो | (सूरह 2:आयत 264)

36. मेहमानों की इज़्ज़त करो | (सूरह51:आयत 26)

37. भलाई पर खुद अमल करने के बाद दूसरों को बढ़ावा दो | (सूरह2:आयत 44)

38. ज़मीन पर फसाद मत करो | (सूरह 2:आयत 60)

39. लोगों को मस्जिदों में अल्लाह के ज़िक्र से मत रोको | (सूरह 2:आयत 114)

40. सिर्फ उन से लड़ो जो तुम से लड़ें | (सूरह 2: आयत 190)

41. जंग के आदाब का ख्याल रखना (सूरह 2:आयत 191)

42. जंग के दौरान पीठ मत फेरना (सूरह 8:आयत 15)

43. दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं (सूरह 2: आयत 256)

44. सभी पैगम्बरों पर इमान लाओ (सूरह 2: आयत 285)

45. हालत माहवारी में औरतों के साथ संभोग न करो (सूरह 2:आयत 222)

46. ​​मां बच्चों को दो साल तक दूध पिलाएँ (सूरह 2:आयत 233)

47. खबर दार ज़िना (fornication) के पास किसी सूरत में भी नहीं जाना (सूरह 17:आयत 32)

48. हुक्मरानो को खूबीे देखकर चुना करो (सूरह 2: आयत 247)

49. किसी पर उसकी ताकत से ज़्यादा बोझ मत डालो (सूरह 2:आयत 286)

50. आपस में फूट मत डालो (सूरह 3:आयत 103)

51. दुनिया की तखलीक चमत्कार पर गहरी चिन्ता करो (सूरह 3: आयत 191)

52. मर्दों और औरतों को आमाल का सिला बराबर मिलेगा (सूरह 3: आयत 195)

53. खून के रिश्तों में शादी मत करो (सूरह 4:आयत 23)

54. मर्द परिवार का हुक्मरान है (सूरह 4:34)

55. हसद और कंजूसी मत करो (सूरह 4:आयत 37)

56. हसद मत करो (सूरह 4:आयत 54)

57. एक दूसरे का कत्ल मत करो (सूरह 4:आयत 92)

58. खयानत करने वालों के हिमायती मत बनो (सूरह 4: आयत 105)

59. गुनाह और ज़ुल्म व ज़यादती में मदद मत करो (सूरह 5:आयत 2)

60. नेकी और भलाई में सहयोग करो (सूरह 5: आयत 2)

61. अक्सरियत मे होना सच्चाई का सबूत नहीं (सूरह 6:आयत 116)

62. इंसाफ पर कायम रहो (सूरह 5:आयत 8)

63.जुर्म की सज़ा मिसाली तौर में दो (सूरह 5:आयत 38)

64. गुनाह और बुराई आमालियों के खिलाफ भरपूर जद्दो जहद करो (सूरह 5:आयत 63)

65. मुर्दा जानवर, खून, सूअर का मांस निषेध हैं (सूरह 5: आयत 3)

66. शराब और नशीली दवाओं से खबरदार (सूरह 5:आयत 90)

67. जुआ मत खेलो (सूरह 5:आयत 90)

68. दूसरों की आस्था का मजाक ना उडाओ (सूरह 6: आयत 108)

69. लोगों को धोखा देने के लिये नाप तौल में कमी मत करो ( सूरह 6: आयत 152)

70. खूब खाओ पियो लेकिन हद पार न करो ( सूरह 7:आयत 31)

71. मस्जिदों में इबादत के वक्त अच्छे कपड़े पहनें (सूरह 7:आयत 31)

72. जो तुमसे मदद और हिफाज़त और पनाह के तलबगार हो उसकी मदद और हिफ़ाज़त करो (सूरह 9:आयत 6)

73. पाक साफ रहा करो (सूरह 9:आयत 108)

74. अल्लाह की रहमत से कभी निराश मत होना (सूरह 12:आयत 87)

75. अज्ञानता और जिहालत के कारण किए गए बुरे काम और गुनाह अल्लाह माफ कर देगा (सूरह 16:आयत 119)

76. लोगों को अल्लाह की तरफ हिकमत और नसीहत के साथ बुलाओ (सूरह 16:आयत 125)

77. कोई किसी दूसरे के गुनाहों का बोझ नहीं उठाएगा (सूरह17: आयत 15)

78. मिसकीनी और गरीबी के डर से बच्चों की हत्या मत करो (सूरह 17:आयत 31)

79. जिस बात का इल्म न हो उसके पीछे(Argue) मत पड़ो। (सूरह 17:आयत 36)

80. निराधार और अनजाने कामों से परहेज़ करो (सूरह 23: आयत 3)

81. दूसरों के घरों में बिला इजाज़त मत दाखिल हो (सूरह 24:आयत 27)

82. जो अल्लाह में यकीन रखते हैं, अल्लाह उनकी हिफाज़त करेगा (सूरह 24:आयत 55)

83. ज़मीन पर आराम और सुकून से चलो (सूरह 25:आयत 63)

84. अपनी दुनियावी ज़िन्दगी को अनदेखा मत करो (सूरह 28:आयत 77)

85. अल्लाह के साथ किसी और को मत पुकारो (सूरह 28:आयत 88)

86. समलैंगिकता से बचा करो (सूरह 29:आयत 29)

87. अच्छे कामों की नसीहत और बुरे कामों से रोका करो (सूरह 31:आयत 17)

88. ज़मीन पर शेखी और अहंकार से इतरा कर मत चलो (सूरह 31:आयत 18)

89. औरतें अपने बनाओ सिनघार तकब्बुर न करें (सूरह 33:आयत 33)

90. अल्लाह सभी गुनाहों को माफ कर देगा सिवाय शिर्क के (सूरह 39:आयत 53)

91. अल्लाह की रहमत से मायूस मत हो (सूरह 39:आयत 53)

92. बुराई को भलाई से दफा करो (सूरह 41:आयत 34)

93. नमाज़ से अपने काम अंजाम दो (सूरह 42:आयत 38)

94. तुम से ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जिसने सच्चाई और भलाई इख्तियार की हो (सूरह 49:आयत 13)

95. दीन मे रहबानियत मौजूद नहीं (सूरह 57:आयत 27)

96. अल्लाह के यहां इल्म वालों के दरजात बुलंद हैं (सूरह 58:आयत 11)

97. ग़ैर मुसलमानों के साथ उचित व्यवहार और दयालुता और अच्छा व्यवहार करो (सूरह 60:आयत 8)

98. अपने आप को नफ़्स की हर्ष पाक रखो | (सूरह 64:आयत 16)

99. अल्लाह से माफी मांगो वो माफ करने और रहम करनेवाला है | (सूरह 73:आयत 20)

*अल्लाह तआला हम सब को कहने , सुनने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फरमाये और
नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताये हुए रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाये
जो फिरको मे बट रहे है उनको उनके हाथो मे दामन ए मुस्तफा ﷺ दे… और सही रास्ते पर चलने की तौफीक दे..
ईमान की दौलत और कलिमा तययब पर खत्मा फरमा….. अमीन अल्लाहुम्मा अमीन ,..

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