Sunday, 14 January 2018

*अरविन्द केजरीवाल महाराष्ट्र दौरा ... कुछ बातें।*

*अरविन्द केजरीवाल महाराष्ट्र दौरा ... कुछ बातें।*

   महाराष्ट्र संकल्प सभा आम आदमी पार्टी महाराष्ट्र के लिए एक मिल का पत्थर साबित होंगी,पार्टी की नयी शुरुवात यहाँ से होने की आशा है।
 
       इस सभा के दो दिन पहलेतक *अनिश्चितता का माहौल था,* लोकल राजनीतीयो की वजह से पोलिस प्रशासन सभा को अनुमति नहीं दे रहा था इसलिए कार्यकर्ताओ को सभा का प्रचार प्रसार करने में समय ही नहीं मिला।
पोलिस परमिशन मिलने के बाद कार्यकर्ताओ ने रात दिन काम किया और सभा को सफल बनाने के लिए अपने आप को झोंक डाला।

       इस कार्यक्रम की सकारात्मक बाजु यह है की *अरविन्द जी के महाराष्ट्र दौरे से कार्यकर्ताओ में नयी ऊर्जा जगी है,* कार्यकर्ताओ में पार्टी के लिए काम करने का जोश दुगना हो गया है । आशा है यहाँ से अब *पार्टी की महाराष्ट्र में जोरदार वापसी होंगी।*

 *कार्यक्रम के कुछ पहलुओं को और भी अच्छा किया जा सकता था जैसे*

१ ) दिल्ली से आये एक साथी ने कहा एयरपोर्ट से आते वक्त कार्यक्रम की जितनी *विजिबिलिटी* दिखनी चाहिए थी उतनी नजर नहीं आयी, रास्तो पर बड़े बड़े होर्डिंग्स लगने चाहिए थे।  अरविन्द जी के स्वागत में एयरपोर्ट पर उत्स्फूर्त कार्यकर्त्ता थे पर रास्ते में उतना ज़्यादा कुछ नज़र नहीं आया।

२ ) रेस्ट हाउस के बाहर *कार्यकर्ताओ की नाराजी* - दरअसल हमारे पार्टी में हर एक कार्यकर्त्ता अरविन्द से हाथ मिलाने एवं सेल्फी खींचने के लिए उतावला है।  शायद यह उनका प्रेम है अरविन्द के प्रति। पर अगर हम गेस्ट हाउस में हमारे हार्डकोर कार्यक्रताओ के साथ अरविन्द जी से १५ मिनट की मीटिंग करवाते तो शायद कार्यकर्त्ता नाराज नहीं होते।

(कार्यकर्ताओ को भी यह समझदारी दिखानी चाहिए की भाई अरविन्द भी एक इंसान है वह हर किसीसे गले नही मिल सकता)

३) दूसरे दिन सुबह औरंगाबाद से सिंदखेड सफर - फिर वही विजिबिलिटी की कमी। .. अरविन्दजी के सभा का जितना प्रचार अपेक्षित था उतना नहीं दिखा , बड़े बड़े होर्डिंग्स लगने चाहिए थे रास्ते पर वह नजर नहीं आये।

४ ) कार्यक्रम का उद्देश - कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश तो ब्रिगेडियर सुधीर सावंत जी का पार्टी प्रवेश था, वह तो काफी अच्छा हो गया, पर इतने बड़े कार्यक्रम का क्या हमे अच्छे से फायदा नहीं उठाना चाहिए था ?.. कम से कम हमे २५ हजार लोगो को इस कार्यक्रम के माध्यम से जोड़ना चाहिए था। पर पार्टी ने जारी किया हुआ मिसकॉल नंबर पुरे सिंदखेड में कही नजर नहीं आया।

५ ) इसका परिणाम यह हुआ अरविन्द जी की सभा में जितनी भीड़ अपेक्षित थी उतनी नजर नहीं आयी, कुछ लोग शायद इस बात से सहमत नहीं होंगे पर इस सच्चाई को हमे स्वीकार करना होंगा। या फिर मुझे अरविंदजी की सभा में ज़्यादा भीड़ की अपेक्षा थी।

६ ) कार्यक्रम स्थल पर नियोजन - मंच का नियोजन तो उत्कृष्ठ था पर बहार कार्यकर्ताओ को धुप में बैठना पड़ा कुर्सियों का भी इंतज़ाम नहीं था। इसका कारण भी वक्त और फंड की कमी हो सकती है। पर पार्टी को इतने बड़े कार्यक्रम को और भी अच्छे तरीके से करना चाहिए था ऐसा मुझे लगता है।

हमने उस कदर कार्यक्रम का प्रचार नहीं किया जिस कदर होना चाहिए था , समझ सकते है बहोत अड़चने आयी होंगी, जैसे परमिशन,फंड, कोऑर्डिनेशन। .. पर यह हमारे लिए *सुनहरा मौका था पार्टी को पैन महाराष्ट्र लेवल पर ले जाने का।*

खैर चलो कोई बात नहीं हम फिर काम करेंगे फिर प्रचार प्रसार करेंगे फिर पार्टी को आगे बढ़ाएंगे। ..

यह शुरुवात है अंत नहीं।

कई जीत बाकी है,कई हार बाकी है।
अभी तो जिंदगी का सार बाकी है।

यहाँ से चले है नयी मंजिल के लिए,
यह एक पन्ना था,अभी तो पुरी किताब बाकी है।.....


   एक कार्यकर्ता
डॉ रियाजखान पठाण



No comments:

Post a Comment